रेत उत्खनन का जिम्मा अब सीएमडीसी को, पंचायतों से अधिकार वापस लेगी सरकार, सीएम बघेल आज दे सकते है आदेश   - गोंडवाना एक्सप्रेस
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रेत उत्खनन का जिम्मा अब सीएमडीसी को, पंचायतों से अधिकार वापस लेगी सरकार, सीएम बघेल आज दे सकते है आदेश  

रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ में अब रेत का खनन पंचायतें नहीं करेंगी। सर्कार ने यह फैसला प्रदेशभर में रेत माफिया द्वारा किए जा रहे खनन व उससे हो रहे पर्यावरण के नुकसान को देखते हुए लिया है। खनन का अधिकार अब सीएमडीसी को दे दिया गया है। लेकिन पंचायतों को रायल्टी पहले के मुकाबले 25 फीसदी राशि बढ़ाकर दी जाएगी। विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आदेश गुरुवार तक कर दिया जाएगा।

उपभोक्ता को सही दाम पर रेत मिले और पर्यावरण संतुलन भी बना रहे यह यही सरकार की मंशा है। ध्यानाकर्षण चर्चा में कांग्रेस विधायक वृहस्पति सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि 13,600 रुपए की पर्ची काटी जाती है, लेकिन शासन के खाते में केवल 600 रुपए जाता है।

पड़ोसी राज्यों में रेत की तस्करी कर महंगे कीमत पर बेची जा रही है। इसकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। धनेंद्र साहू, अजय चंद्राकर, गुलाब कमरों ने प्रदेशभर में रेत माफिया द्वारा किए जा रहे खनन व उससे हो रहे पर्यावरण के नुकसान की ओर ध्यान खींचा।

उन्होंने कहा कि केवल कागजों पर ही रेत पर पंचायतों का नियंत्रण है। धनेंद्र साहू ने कहा कि पिछली सरकार की गलत नीतियों से रेत माफिया को बढ़ावा मिला। मशीनों से खुदाई की वजह से मजदूर बेरोजगार हो गए। रेत माफिया से टकराव से खून-खराबे के हालात भी बन रहे हैं।

अब ये कदम उठाए जाएंगे 

रेत का खनन अब सीएमडीसी के जरिये कराया जाएगा।
अब मैकेनाइज्ड विधि से पर्यावरण स्वीकृति ली जाएगी।
राज्य और राज्य के बाहर के लिए दो पीट पास जारी होंगे।
मशीनों से निकालने पर भी रोक। ताकि लोगों को रोजगार मिले।

पंचायतों से ज्यादा माफिया उठा रहे थे फायदा

मुख्यमंत्री ने माना कि यूपी, महाराष्ट्र तक रेत माफिया काम कर रहा है? यहां से रेत ले जाकर वहां 13 हजार से 27 हजार रुपए प्रति ट्रक बेचा जा रहा है। रायल्टी की चोरी हो रही है। इससे पंचायतों के राजस्व में वृद्धि नहीं हो रही है। विभाग ने कड़े कदम भी उठाए हैं। पिछले कुछ सालों से छत्तीसगढ़ में रेत खनन का अधिकार पंचायतों को दिया गया था। इसका मकसद पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन इसका फायदा पंचायतों को मिलने के बजाय कुछ माफिया उठा रहे थे।

अवैध उत्खनन का काम लगातार चल रहा था। ठेकेदार खुद पर्यावरण विभाग से अनुमति ले रहे हैं। पिछले दिनों खनिज विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी हुई थी।

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