मुख्यमंत्री ने सोनाखान की लीज पर रोक के साथ-साथ डीएमएफ फंड के ढाई हजार करोड़ के काम पर भी लगाई रोक - गोंडवाना एक्सप्रेस
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मुख्यमंत्री ने सोनाखान की लीज पर रोक के साथ-साथ डीएमएफ फंड के ढाई हजार करोड़ के काम पर भी लगाई रोक

रायपुर (एजेंसी) | भूपेश सरकार ने सोनाखान की लीज पर रोक लगा दिया है। यह फैसला सीएम बघेल ने खनिज विभाग की समीक्षा बैठक में लिया। साथ ही बघेल ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के ढाई हजार करोड़ के काम पर भी रोक लगा दी है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह की धरती को खोदने की अनुमति देने पर हैरानी जताते हुए खनन लीज की जांच के निर्देश दिए।




आपको बता दे सोनाखान में हुई इस नीलामी को देश में सोने की किसी खान की पहली नीलामी बताया गया था। अब विभाग रिपोर्ट तैयार कर सरकार को देगा, इसके बाद तय होगा कि खान में माइनिंग होगी या नहीं। पिछले साल ही सोनाखान में माइनिंग की नीलामी हुई थी। दावा किया गया था ये सरकार की सबसे महंगी नीलामी है। वेदांता को करीब 600 करोड़ में माइनिंग लीज दी गई। अनुमान के मुताबिक सोनाखान में 2700 किलो स्वर्ण भंडार है।

डीएमएफ की राशि का भारी दुरूपयोग 

उन्होंने जिला खनिज न्यास संस्थान की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि खनन प्रभावित क्षेत्रों व लोगों का ध्यान रखे बिना बड़े पैमाने पर राशि खर्च की गयी। इसमें से अधोसंरचना के नाम पर गैर जरूरी निर्माण कार्यों पर 4553 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हुए थे। फिर भी 2520 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस राशि का भारी दुरुपयोग अनावश्यक व अनुपयोगी निर्माण कार्यों में किया गया था। बघेल ने ऐसे स्वीकृत, लेकिन शुरू नहीं हुए निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करने को कहा। उन्होंने निर्मित कार्यों की भी जांच कराने के निर्देश दिए। बघेल ने कहा कि इस राशि का उपयोग शिक्षा ,स्वास्थ्य,जीवन स्तर ,आजीविका के लिए किया जाना चाहिए जो इसका मूल उद्देश्य है।

क्यों लगाया रोक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि सोनाखान के जंगल सन 1857 के अमर शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृतियां अनमोल धरोहर हैं। उनकी जन्म-कर्म भूमि पर खनन अनुमति देना चिंताजनक है। समीक्षा की जाएगी कि किन परिस्थितियों में खुदाई का निर्णय लिया गया।

देश में सोने के आयात में कमी आएगी: पिछली भाजपा सरकार

जबकि पिछली भाजपा सरकार का कहना था कि बाघमारा (सोनाखान) गोल्ड माइन्स का ई-ऑक्शन किया गया। आईबीएम विक्रय मूल्य 74,712 रुपए प्रति ट्राय ऑन्ज का 12.55 प्रतिशत बोली लगाकर, खदान वेदांता कंपनी ने हासिल की। नीलामी से छत्तीसगढ़ को प्रचलित रॉयल्टी आदि की आय के अलावा करीब 81.39 करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त होगी। बाघमारा सोने की खदान के विकास से भारत में सोने के आयात में कमी आ सकती है।



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