Chhattisgarh India

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल : छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की पूरे देश में चर्चा

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि हमने जनता से किए वादे पूरे किए हैं। आदिवासियों, किसानों सहित सभी वर्गाें का राज्य सरकार पर अटूट भरोसा है। हम गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। पुरखों के समृद्ध और शांतिपूर्ण छत्तीसगढ़ के सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। आज विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल की पूरे देश में चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर स्थित एक निजी होटल में एबीपी न्यूज द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन की शुरूआत में मौन रखकर देश के पहले सीडीएस शहीद जनरल श्री बिपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मधुलिका रावत और शहीद अन्य जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा राजनीति में जब आया तो यह सोचकर आया था कि मुझे जनता की सेवा करना है। जनता की हक की लड़ाई लड़ना है, भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करने का मौका जनता ने दिया है, यह मेरा सौभाग्य है। सरकार पर जनता ने विश्वास कर तीन-चौथाई बहुमत दिया। सरकार गठन के बाद कैबिनेट का पहला फैसला 11 लाख किसानों का 9 हजार करोड़ रुपए ऋण माफी का, दूसरा 2500 रुपये धान खरीदी का फिर लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापसी का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि हमने आदिवासियों, किसानांे, महिलाओं और युवाओं को सशक्त किया है, इसलिए आज छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा देश भर में है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के हक का पैसा नहीं दे रही है। तीन वर्षाें में लगभग 17 हजार करोड़ रूपए केन्द्र से नहीं मिले। उन्होंने कहा कि पहले केन्द्र की योजनाओं के लिए राज्यों को शत-प्रतिशत राशि मिलती थी, बाद में यह 90 अनुपात 10 और 75 अनुपात 25 हुई। अब केन्द्रीय योजनाओं के लिए केन्द्र और राज्य से मिलने वाली 60 अनुपात 40 और 50 अनुपात 50 हो गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना को बंद नहीं किया गया है। केन्द्र पैसा दे, तो हम तुरंत काम शुरू कर देंगे। गरीबों के मकान बनने चाहिए। उन्होंने अगले दो साल के राज्य सरकार के संकल्प के संबंध में कहा कि गोधन न्याय योजना सहित प्रारंभ की गई कल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसका लाभ लोगों को मिल रहा है। गोधन न्याय योजना में गोबर खरीद कर लगभग 8 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया गया। किसान खेतों में इसका उपयोग कर रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ में वर्मी कम्पोस्ट डीएपी खाद का सबसे अच्छा विकल्प बन गया है। गोबर से बिजली बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया है। गोबर अभी तक लीपने के काम में आता रहा है, अब इससे पेंट भी बनाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का यह प्रयास है कि समाज के कमजोर तबके के लोगों सहित भूमिहीन भी आर्थिक रूप से सम्पन्न बने। हमारी पहचान, छत्तीसगढ़ की चिन्हारी नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी और हमारी संस्कृति का संरक्षण हो। आज छत्तीसगढ़ में किसान पैरा जलाते नहीं दिखते, बल्कि गोधन के लिए पैरा दान कर रहे हैं। आदिवासी अंचलों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का काम किया गया है। बस्तर अंचल में सैकड़ों बंद पड़े स्कूलों को शुरू किया गया। हाट बाजार क्लिनिक और मोबाइल मेडिकल यूनिट जैसी योजनाएं प्रारंभ की गई। कुपोषण में 32 प्रतिशत की कमी आई है। मलेरिया मुक्ति अभियान से मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने लघु वनोपजों की खरीदी, हाफ बिजली बिल योजना, किसानों को मुफ्त बिजली, छोटे भू-खण्डों की खरीदी, जमीन की गाईड लाईन दरों में 30 प्रतिशत की कमी जैसी कल्याणकारी और नवाचार योजनाओं का उल्लेख किया। कोरोना काल में लोगों की जेब में विभिन्न योजनाओं के जरिए पैसे डालने का काम सरकार ने किया, जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी और छत्तीसगढ़ में मंदी का असर नहीं रहा।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि भगवान राम हमारी आस्था, हमारी संस्कृति, हमारी पहचान है। धान नापने की शुरूआत राम नाम से की जाती है। भगवान राम हमारी रग-रग में और छत्तीसगढ़ के कण-कण में बसे हैं। कौशल्या माता छत्तीसगढ़ की बेटी है। भगवान राम ने वनवास का सबसे अधिक समय छत्तीसगढ़ में बिताया था। हमने राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकसित करने की शुरूआत की है। देश के एक मात्र कौशल्या माता मंदिर का सौंदर्यीकरण किया है। हम गाय के नाम पर वोट नही माँगते बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के कार्य कर रहे है।

श्री बघेल ने कहा कि हमारे पास सरप्लस पैडी जिससे एथेनॉल बनाने की अनुमति केन्द्र से मांगी गई है, लेकिन अब तक इसकी अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी के बारदाने नहीं मिल रहे हैं। केन्द्र द्वारा छत्तीसगढ़ से उसना चावल लेने के फैसले से छत्तीसगढ़ लगभग 500 राईस मिलों के मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। मिले बंद हो गई है।
श्री बघेल ने कहा कि अब पत्रकार यहां नक्सलियों से सम्बंधित प्रश्न नही करते। हमने आदिवासी अंचल में रोजगार दिया, लघु वनोपज में वृद्धि की, समर्थन मूल्य में वृद्धि की, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं में वृद्धि की है, उनका विश्वास सरकार के प्रति बढ़ा है, जो काम हमने शुरू किया उसे सफल करना है, गोधन न्याय योजना, गोबर खरीदी कर रहे, 8 लाख टन वर्मी कंपोस्ट समूह की महिलाओं ने बनाया है, अब गोबर से बिजली बना रहे, पेन्ट बना रहे, गांव को स्वावलंबी बनाना है, पुरखों ने समृद्ध और शांतिपूर्ण छत्तीसगढ़ का जो सपना देखा था, उसे पूरा कर रहे हैं।d