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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ भवन में बिलासा हैंडलूम का किया शुभारंभ : छत्तीसगढ़ के कारीगरों का दिल्ली में नजर आएगा हुनर

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ भवन में बिलासा हैंडलूम का किया शुभारंभ : छत्तीसगढ़ के कारीगरों का दिल्ली में नजर आएगा हुनर

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नई दिल्ली. अब दिल्ली में भी छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प की झलक और कारीगरों का हुनर नजर आएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में बिलासा हैंडलूम का शुभारंभ किया। बिलासा हैंडलूम में छत्तीसगढ़ के कुशल कारीगरों की कला-कृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। बिलासा हैंडलूम के माध्यम से दिल्लीवासियों को छत्तीसगढ़ के हैंडलूम उत्पाद अब आसानी से उपलब्ध हो पाएगा। छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों की मांग को देखते हुये देश की राजधानी में हस्तशिल्प कला एम्पोरियम खोलने की काफी समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से छत्तीसगढ़ की कला को उपयुक्त प्लेटफार्म मिलेगा और छत्तीसगढ़ के हैंडलूम उत्पादों का बेहतर मार्केटिंग और प्रचार प्रसार हो सकेगा। बिलासा हैंडलूम के खुलने से अब लोगों को सारे हैंडलूम उत्पाद एक जगह ही मिल सकेंगे। शुभारंभ अवसर पर मौजूद मोतीबाग के कम
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे, 23 अक्टूबर को ‘जनचौपाल: भेंट-मुलाकात‘ कार्यक्रम स्थगित

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 22 अक्टूबर को झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और नई दिल्ली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 22 अक्टूबर को सुबह 10 बजे राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से विशेष विमान द्वारा झारखण्ड के बोकारो के लिए रवाना होंगे। श्री बघेल वहां से जामताड़ा जिला मुख्यालय पहुंचकर वहां आयोजित आमसभा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री बोकारो से कानपुर (उत्तरप्रदेश) आएंगे और यहां अपरान्ह 3.30 बजे किदवई नगर में आयोजित अभिनंदन समारोह और शाम 5 बजे लाजपत भवन लॉन मोतीझील में आयोजित ‘शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जयंती समारोह’ तथा अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री कानपुर से कार द्वारा लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचकर विशेष विमान द्वारा रात्रि 10 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे और छत्तीसगढ़ सदन में रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास
विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना बस्तर दशहरा विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है, 75 दिनों तक मनाया जाता है

विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना बस्तर दशहरा विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है, 75 दिनों तक मनाया जाता है

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बस्तर का दशहरा अपनी अभूतपूर्व परंपरा व संस्कृति की वजह से विश्व प्रसिद्ध है। यह कोई आम पर्व नहीं है यह विश्व का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पर्व है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा 75 दिन तक मनाया जाता है। बस्तरवासी वगभग 600 साल से यह पर्व मनाते आ रहे हैं। बस्तर ही एकमात्र जगह है जहां दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। यह पर्व बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा हुआ है। बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई। प्रतिवर्ष दशहरा पर्व के लिए परगनिया माझी अपने अपने परगनों से सामग्री जुटाने का प्रयत्न करते थे। सामग्री जुटाने का काम दो तीन महीने पहले से होने लगता था। इसके लिए प्रत्येक तहसील का तहसीलदार सर्वप्रथम बिसाहा पैसा बाँट देता था, जिससे गाँव-गाँव से बकरे सुअर भैंसे चावल दाल तेल नम
नवरात्रि विशेष: जानिए गंगरेल बांध के समीप स्थित माता अंगारमोती के बारे में

नवरात्रि विशेष: जानिए गंगरेल बांध के समीप स्थित माता अंगारमोती के बारे में

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गंगरेल बांध जिसे आर. एल. बांध ( रविशंकर सागर बांध ) भी कहते है। सागर बांध भारत के छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। यह महानदी नदी के पार बनाया गया है छत्तीसगढ़ में यह सबसे लम्बा बांध है। यह बांध वर्षभर के सिचाई प्रदान करता है जिससे किसान प्रतिवर्ष दो फसलों का उत्पादन कर सकते है और भिलाई स्टील प्लांट और नई राजधानी रायपुर को भी पानी प्रदान करता है। प्लांट में 10 मेगावाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर क्षमता है। यह रायपुर राजधानी से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन् 1978 में जब गंगरेल बांध बनकर तैयार हुआ उस समय अनेक गाँव के साथ अनेक देवी-देवतओं के मंदिर भी जल में समां गए थे, जिनमें से एक माँ अंगारमोती का मंदिर भी था। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाकर गंगरेल बांध के समीप स्थापित किया गया है। यहाँ विशाल वृक्ष के नीचे खुले चबूतरे पर उनकी प्राण-प्रति
नवरात्रि विशेष: जानिए राजनांदगांव स्थित बर्फानी धाम और माँ पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

नवरात्रि विशेष: जानिए राजनांदगांव स्थित बर्फानी धाम और माँ पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

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बर्फानी धाम छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर में एक विशाल हिन्दू मंदिर है। यह दुर्ग से 40 किलोमीटर (25 मिनट) दूर है। एक बड़ा शिवलिंग मंदिर के शीर्ष पर देखा जा सकता है, जबकि एक बड़ी नंदी की प्रतिमा सामने खड़ी है। मंदिर का निर्माण तीन स्तरों में किया गया है। सबसे नीचे माँ पाताल भैरवी का मंदिर है। दूसरा मंजिल में नवदुर्गा या त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर है और सबसे ऊपर शिव जी का मंदिर है। वीडियो देखे https://youtu.be/56bBWe_72YI बर्फानी धाम राजनांदगाव कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: पाताल भैरवी देवी मंदिर राजनंदगांव में आशा नगर के पास स्थित है। यह राजनांदगांव बस स्टेशन से सिर्फ 5 किमी दूर स्थित है। यह लोकप्रिय रूप से बरफ़ानी धाम या पाताल भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ट्रेन से: सीधे लोकल या पैसेंजर ट्रेने रायपुर से उपलब्ध हैं। राजनांदगांव रायपुर से 89 किमी (1:30 घंटे) दूर
रायपुर : मुख्यमंत्री ने 50 एकड़ में बने नंदनवन जू (चिड़ियाघर) का लोकार्पण किया

रायपुर : मुख्यमंत्री ने 50 एकड़ में बने नंदनवन जू (चिड़ियाघर) का लोकार्पण किया

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रायपुर | मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान आज नवा रायपुर अटल नगर स्थित नंदनवन जंगल सफारी में चिड़ियाघर (जू) का लोकार्पण किया। आज उद्घाटित जंगल सफारी चिड़ियाघर में वन्य प्राणियों के लिए कुल 37 बाड़े होंगे। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस चिड़ियाघर में अभी 11 बाड़े बनाए गए हैं। चिड़ियाघर में प्राकृतिक परिवेश में दो व्हाइट टाइगर, 4 लायन, 2 रायल बंगाल टाइगर, 2 लेपर्ड, 2 हिमालयन बियर, 2 हिप्पोपोटेमस, 2 घड़ियाल, 20 ताजे पानी में पाए जाने वाले कछुए, 4 बेंगाल मॉनिटर लिजार्ड, 13 स्टार कछुए, 8 क्रोकोडायल अलग-अलग बाड़े में रखे गए हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार वन्य प्राणियों और वनों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए दृढ़ संकल्पित है। वन विभाग द्वारा विकसित जंगल सफारी और चिड़ियाघर देश में अनूठा है । भविष्य में यहां और भी नए वन्य प्र
नवरात्रि विशेष: जानिए मौली माता मंदिर, फिंगेश्वर के शाही दशहरा के बारे में

नवरात्रि विशेष: जानिए मौली माता मंदिर, फिंगेश्वर के शाही दशहरा के बारे में

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बस्तर दशहरे की तरह फिंगेश्वर का शाही दशहरे की अपनी अलग पहचान है। यह दशहरा भी मौली माता की पूजा अर्चना के बाद यहाँ के शाही राजा इस त्यौहार की शुरुआत करते है। जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। मौली माता का ऐतिहासिक मंदिर गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड में स्थित है। राजधानी रायपुर से फिंगेश्वर लगभग 60 KM दूर है। पौराणिक मान्यता पौराणिक मान्यता व पुजारी सोभा राम भंडारी के अनुसार फिंगेश्वर के राजा ठाकुर दलगंजन सिंह यात्रा में जा रहे थे तभी अचानक हमलावरों ने आक्रमण कर दिया वाही मौली माता एक बुढ़िया के रूप में आयी वहां राजा ठाकुर दलगंजन सिंह हमलावरों से घिर गए थे तब उन्हें अचानक माता जी का साक्षात्कार हुआ। माता जी की कुछ इशारा पाते ही वह उठ खड़े हुए और युद्ध में विजयी हुए। तब राजा ने माता के पास जाकर प्रणाम कर वापिस महल की ओर आने लगे माता भी वृद्धा का रूप लेकर राजा के पीछे
नवरात्रि विशेष: जानिए बिलासपुर स्थित प्राचीन महामाया मंदिर, रतनपुर का इतिहास

नवरात्रि विशेष: जानिए बिलासपुर स्थित प्राचीन महामाया मंदिर, रतनपुर का इतिहास

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भारत के दक्षिण पूर्व में स्थित करोड़ों लोगों की श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक, वास्तुकला की मिसाल तथा हमारी संस्कृति की पहचान "श्री महामाया मंदिर, रतनपुर" आपका स्वागत करता है। कई दशकों से इस मंदिर ने अनेक इतिहासकारों तथा पुरातत्त्वविदों को अपनी ओर आकर्षित किया है। चारों ओर से हरी हरी पहाड़ियों से घिरी, लगभग 150 तालों को अपनी गोद में समेटे रतनपुर नगरी में वर्ष में 2 बार भक्तों का तांता लगता है। भक्तगण लाखों की संख्या में नवरात्र के पर्व पर अपनी आराध्य देवी महामाया की प्रतिमा-द्वय के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं। बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग (छत्तीसगढ़) में बिलासपुर से 25 किलोमीटर पर ऐतिहासिक रत्नपुर (अब रतनपुर) की नगरी में स्थित दर्जनों छोटे मंदिर, स्तूप, किले तथा अन्य निर्माणों के पुरावशेष मानों अपनी कहानी बताने के लिये तत्पर हैं। महामाया मंदिर का इतिहास रतनपुर का इतिहास लगभग एक सहस्
डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ मंदिर में हुई एक घटना ने पुलिस का सकारात्मक चेहरा पेश किया है। राजनांदगांव जिले के इस मंदिर में बेसुध पड़ी एक महिला को उसका पति ऊपर चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। बीमार महिला बेहद कमजोर होने की वजह से सीढ़ियां नहीं चढ़ पा रही थी। पास के ही सहायता केंद्र में तैनात महिला पुलिसकर्मी पूजा देवांगन ने कंधों से सहारा देकर महिला को ऊपर मंदिर तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पूजा ने उसे गोद में उठाया और तकरीबन 100 सीढ़ियां चढ़कर महिला को मां बम्लेश्वरी के दर्शन करवाए। बिलासपुर के रहने वाले लेखक द्वारिका प्रसाद अग्रवाल इस दौरान खुद वहां मौजूद थे। सिपाही पूजा के जज्बे को उन्होंने अपने कैमरे में कैद कर लिया। द्वारिका ने बताया कि पूजा से उनका परिचय सोशल मीडिया के जरिए हुआ था। वह यहां पहुंचकर पूजा से मुलाकात कर ही रहे थे कि, तब ही उनके साथ मंदिर आई पत्नी
नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है श्री राम की माता कौशल्या का यह मंदिर

नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है श्री राम की माता कौशल्या का यह मंदिर

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी ग्राम में माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर विराजमान है। यह मंदिर दुर्लभतम है, जैसे पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र प्राचीन मंदिर है, वैसे ही रायपुर के पास कौशल्या जी का एकमात्र मंदिर स्थित है। प्राकृतिक सुषमा के अनेक अनुपम दृश्य इस स्थल पर दृष्टिगोचर होते हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में मां कौशल्या की गोद में बालरुप में भगवान श्रीरामजी की वात्सल्यम प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं भक्तों का मन मोह लेती है। दक्षिण कौशल यानी छत्तीसगढ़ राज्य मां कौशल्या के नाम से जाना जाता है। इसे भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है। सोमवंशी नरेश ने माता कौशल्या और भगवान राम को 7 तालाबों के बीच स्थापित कर आस्था का दीप जलाया था। इस भक्ति भाव की किरणें आज पूरे देश में फैल रही हैं। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जननी माता कौ