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#ViralPhoto सोशल मीडिया पर वायरल हुई दिवाली की रात की ये तस्वीर, ग्राहक के इंतजार में सड़क किनारे दो बच्चो के साथ ही सो गया शख्स

#ViralPhoto सोशल मीडिया पर वायरल हुई दिवाली की रात की ये तस्वीर, ग्राहक के इंतजार में सड़क किनारे दो बच्चो के साथ ही सो गया शख्स

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दिवाली की इस तस्वीर के पीछे की कहानी आपको कर देगी भावुक-हर किसी के नसीब मेंनहीं होती खुशियां... रोशनी का पर्व दीपावली पिछले दिनों पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया, दिवाली की खुमारी अभी भी लोगों पर बनी हुई, लेकिन इस बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई है, जो दिलों-दिमाग को झकझोर कर रख देगी। इसे इंदौर में रहने वाले ईश्वर शर्मा नाम के यूजर ने फेसबुक पर शेयर किया है। तस्वीर इंदौर की ही बताई जा रही है, हालांकि तस्वीर इंदौर की ना भी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, ये भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई की भी हो सकती है, क्योंकि कमोवेश हालात हर शहर एक जैसे ही है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); तस्वीर में क्या है? तस्वीर में एक शख्स इत्मिनान से सड़क किनारे सोता हुआ दिखाई दे रहा है, उसके साथ उसके दो बच्चे भी हैं जो गंदा सा कंबल ओढ़े हुए दिखाई
#ViralPhoto सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस फोटो की कहानी जानकर भावुक हो जाएंगे आप

#ViralPhoto सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस फोटो की कहानी जानकर भावुक हो जाएंगे आप

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आमतौर पर पुलिस को लेकर लोगों राय बहुत अच्छी नहीं रहती, अगर बात यूपी पुलिस की हो तो पिछले कुछ महीनों की घटनाएं सोच को और पुख्ता कर देती हैं लेकिन यूपी के अमरोहा में ऐसा वाक्या सामने आया है कि पुलिसवालों को सैल्यूट करने का मन करेगा। इस वाक्ये से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दो छोटे-छोटे बच्चे बैठ कर मिट्टी के दीये बेचते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं उनके सामने पुलिस वाले खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट एक यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा- 'बेहद मासूम। सुबह से बैठे हैं। उम्मीद है दीए बिकेंगे। जिन बच्चों को त्योहार पर उछल कूद करनी चाहिए वो बाज़ार में बैठे हैं। मजबूरी है, गरीबी की। बेबसी की। चार पैसे आ जाएं तो खुश हो जाएं, मगर बच्चों की लाचारी देखिए दीये नहीं बिक रहे। लोग बाज़ार आ रहे हैं तो लाइट खरीद रहे हैं। झालर खरीद रहे हैं। महंगे आइट
जानिए कौन था बस्तर का रियल मोगली के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध “चेंदरू द टाईगर बाय”

जानिए कौन था बस्तर का रियल मोगली के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध “चेंदरू द टाईगर बाय”

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शकुंतला दुष्यंत के पुत्र भरत बाल्यकाल में शेरों के साथ खेला करते थे वैसे ही बस्तर का यह लड़का शेरों के साथ खेलता था। इस लड़के का नाम था चेंदरू। चेंदरू द टायगर बाय के नाम से मशहुर चेंदरू पुरी दुनिया के लिये किसी अजुबे से कम नही था। बस्तर मोगली नाम से चर्चित चेंदरू पुरी दुनिया में 60 के दशक में बेहद ही मशहुर था। चेंदरू के जीवन का दिलचस्प पहलू था उसकी टाइगर से दोस्ती, वह भी रियल जंगल के। दोस्ती भी ऐसी कि दोनों हमेशा साथ ही रहते थे, खाना, खेलना, सोना सब साथ-साथ। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बस्तर का रियल मोगली कहलाने वाले चेंदरू ने 2013 में दुनिया को अलविदा कहा था। साठ साल पहले चेंदरु ने दुनिया भर का ध्यान खींचा था। फ्रांस, स्वीडन, ब्रिटेन और दुनिया के कोने-कोने से लोग सिर्फ उसकी एक झलक देखने को, उसकी एक तस्वीर अपने कैमरे में कैद करने को बस्तर पहुंचते थे। बस
क्या है सबरीमाला विवाद? पढ़िए भगवान अयप्पा के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है

क्या है सबरीमाला विवाद? पढ़िए भगवान अयप्पा के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते है

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सबरीमाला मंदिर महिला प्रवेश को लेकर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रवेश पर प्रतिबंध को हटाए जाने का फैसला सुनाया तब से कई हिंदूवादी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं आइए समझते हैं यह विवाद क्या है? क्यों इसका विरोध हो रहा है? भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है विश्‍व प्रसिद्ध सबरीमाला का मंदिर। यहां हर दिन लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में ये मान्यता पिछले काफी समय से चल रही थी कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश ना करने दिया जाए। कौन है भगवान अयप्पा भगवान अयप्पा विष्णु और शिव के पुत्र हैं. यह किस्सा उनके अंदर की शक्तियों के मिलन को दिखाता है न कि दोनों के शारीरिक मिलन को। इनसे सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्
कौन है स्मिता तांडी जिन्हे नवरात्री पर सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महतारी तोला प्रणाम”

कौन है स्मिता तांडी जिन्हे नवरात्री पर सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महतारी तोला प्रणाम”

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नवरात्री के पवित्र नौ दिन चल रहे है। पुरे देश में नारी शक्ति रूपी दुर्गा माँ की आराधना की जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने #महतारी_तोला_प्रमाण का ट्वीट किया। नारी शक्ति के प्रतीक स्वरुप राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी का फोटो शेयर करते हुए कहा, "यदि निस्वार्थ सेवा का भाव हो तो हर राह स्वयं ही सहज हो जाती है। इस बात का साक्षात उदाहरण है प्रदेश की रोल-मॉडल बन चुकी महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी की नेक भावना को प्रणाम करता हूँ। #महतारी_तोला_प्रणाम" यदि निस्वार्थ सेवा का भाव हो तो हर राह स्वयं ही सहज हो जाती है। इस बात का साक्षात उदाहरण है प्रदेश की रोल-मॉडल बन चुकी महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी की नेक भाव
एपीजे अब्दुल कलाम जन्मदिन विशेष: सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते, पढ़िए डॉ. कलाम की बाते जो आपको प्रेरणा देगी

एपीजे अब्दुल कलाम जन्मदिन विशेष: सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते, पढ़िए डॉ. कलाम की बाते जो आपको प्रेरणा देगी

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भारत देश के 11वें राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का आज (15 अक्टूबर) को जन्मदिन है। डॉ. कलाम वर्ष 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति चुने गए थे। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को हुआ और 27 जुलाई साल 2015 को डॉ.कलाम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। डॉ.कलाम के कहे हुए बोल आज भी प्रेरणादायी हैं। एक मछुआरे के बेटे का दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का राष्ट्रपति बन जाना यूं ही नहीं हुआ। वे जीवन के कड़े संघर्ष और अपनी सकारात्मक को लिए आगे बढ़ते रहे और लोगों को भी इसी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के प्रेरणा देते है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); डॉ कलाम हमेशा अपने सपनों पर विश्वास करने की बात कहते थे। उन्हें अपने सपनों पर भरोसा था शायद इसीलिए जीवन में विपरीत परिस्थितियों के होते हुए भी वह उस शिखर तक पहुंचे, जहां तक पहुंचने वाले दुनिया में कम ही शख्स होते
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – V

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – V

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आज हम राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया सीरीज की आखिरी कड़ी पेश कर रहे है। इसमें पढ़िए किस तरह राजा प्रवीर समेत अनेको आदिवासियों को बड़ी ही निर्ममता से गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतर दिया गया। इस कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि किस तरह प्रवीर पर बस्तर को नागालैंड बनाने तथा हिंसक प्रवृत्तियों को भडकाने के आरोप लगते रहे हैं तथापि गंभीर विवेचना करने पर ज्ञात होता है कि उनके अधिकतम आन्दोलन शांतिप्रिय तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की परिधि में ही थे। 1964 ई. में प्रवीर ने पीपुल्स वेल्फेयर एसोशियेशन की स्थापना की। 12 जनवरी 1965 को प्रवीर ने बस्तर की समस्याओं को ले कर दिल्ली के शांतिवन में अनशन किया था। गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा द्वारा समस्याओं का निराकरण करने के आश्वासन के बाद ही प्रवीर ने अपना अनशन तोडा था। 6 नवम्बर 1965 को आदिवा
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – IV

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – IV

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एक समय था, जब बस्तर भारत का सबसे बड़ा जिला था। एक संभाग के रूप में वह आज भी देश के सबसे बड़े संभागों में से एक है। इसमें कुल चार जिले शामिल हैं – बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर और कोंडागांव। यहां की प्रमुख बोली गोंडी और उसकी उपबोली हल्बी है। हल्बी से याद आया कि हल्बी गीतों में भंजदेव का इतिहास समाया हुआ है। इस काकतीय वंश के प्रथम राजा अन्नमदेव थे और इस अन्नमदेव को हल्बी गीतों में चालकी राजा कहा जाता है। चालक का अर्थ हुआ चालुक्य। यह सर्वविदित है कि चालुक्यों से ही काकतीयों का विस्तार हुआ है। राजा प्रवीर की कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि किस तरह मालिक मकबूजा की लूट आधुनिक बस्तर में हुए सबसे बडे भ्रष्टाचारों में से एक था जिसकी बारीकियों को सबसे पहले उजागर प्रवीर ने ही किया था। राजा ने इस भ्रष्टाचार और संशोधन का व्यापक विरोध किया। हुक्मरान नेताओ और महत्वकांक्षी नौकरशाहों ने अपने हितो क
राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – III

राजा प्रवीर चंद्र भंज देव: छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का वो मसीहा जो राजनीति की भेट चढ़ गया – III

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आजादी के समय भारत में लगभग 565 रियासत थीं, जिनके शासक नवाब या राजा कहलाते थे। आजाद भारत की कई प्रमुख समस्याओं में एक समस्या इन रियासतों के विलय की भी थी। ऐसे कई राजा या नवाब थे जो आजादी और विलय को देशहित में मानते थे। इसीलिए कुछ रियासतों को छोड़ कर अधिकांश रियासतों ने स्वेच्छा से भारत के संघीय ढांचे का हिस्सा बनना स्वीकार कर लिया। 15 दिसंबर 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने मध्यप्रांत की राजधानी नागपुर में छत्तीसगढ़ की सभी 14 रियासतों के शासको को भारत संघ में शामिल होने का आग्रह किया। महाराजा प्रवीरचंद्र भंज देव ने आदिवासियों के विकास के लिए विलय को स्वीकृति प्रदान करते हुए स्टेटमेंट ऑफ़ सबसेशन पर हस्ताक्षर कर दिए। इस तरह 1 जनवरी 1948 में बस्तर के मध्यप्रांत में विलय होने की औपचारिक घोषणा हुई और 9 जनवरी 1948 में बस्तर मध्यप्रांत का हिस्सा बन गया। बस्तर और कांकेर की रियासतों को मिलकर बस्तर ज
विख्यात पद्मश्री नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी को Google ने डूडल बनाकर किया याद

विख्यात पद्मश्री नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी को Google ने डूडल बनाकर किया याद

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भारत के जाने-माने नेत्र सर्जन डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी (Dr. Govindappa Venkataswamy) का आज 1 अक्टूबर को 100वां जन्मदिन है। इस अवसर पर दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल (Google) ने डूडल (Doodle) बनाकर उन्हें याद किया।वेंकटस्वामी का जन्म 1 अक्टूबर 1918 में हुआ था। इन्हें देश में अंधेपन से जूझ रहे लोगों की सेवा के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वेंकटस्वामी की मृत्यु 87 साल की उम्र में 7 जुलाई 2006 को हुई। उन्होंने अपने जीवन में लाखों लोगों की जिंदगी में रोशनी बिखेरी।आंखों के इलाज को लेकर उन्होंने एक मिसाल पेश किया। उनकी बेहतरीन उपलब्धि की वजह से आज गूगल उन्हें सम्मान दे रहा है। गठिया होने के बावजूद ऑपरेशन जारी आंखों के इतने बड़े डॉक्टर भारतीय सेना के मेडिकल कोर में थे. तमिलनाडु में एक गरीब परिवार में जन्मे डॉ. गोविंदप