पांच नवजातों के मौतों के बाद भी सुधार नहीं, सिम्स में बच्चों के वार्ड के पास फिर शॉर्ट शर्किट - गोंडवाना एक्सप्रेस
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पांच नवजातों के मौतों के बाद भी सुधार नहीं, सिम्स में बच्चों के वार्ड के पास फिर शॉर्ट शर्किट

बिलासपुर (एजेंसी) | बिलासपुर जिले के सरकारी अस्पताल सिम्स के एनआईसीयू के ठीक बगल से स्थित इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में सोमवार शाम शार्ट-शर्किट हो गया। इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में शार्ट-शर्किट होने व चिंगारी निकलने की बात पता चलते ही प्रभारी डीन, प्रभारी अधीक्षक, एनआईसीयू के प्रमुख सहित अन्य कर्मचारी वहां पहुंच गए।

हालांकि गनीमत रही की इस बार शार्ट-शर्किट के बाद निकली चिंगारी ने इस बार भयानक रूप नहीं लिया। इस घटना के समय एनआईसीयू में 22 शिशु भर्ती हैं जो कि पूरी तरह से सुरक्षित हैं। आपको बता दे सिम्स के इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में 22 जनवरी की दोपहर शार्ट-शर्किट होने से आग लग गई थी। तब उस दिन भी 22 बच्चे भर्ती थे जिसमे से 5 ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद सिम्स प्रबंधन ने बिजली व्यवस्था सही कराने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की थीं, लेकिन लगभग दो माह बाद भी सिम्स की बिजली व्यवस्था सही नहीं की जा सकी है।

बिजली सप्लाई बंद कर बदली गई वायरिंग

इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में शार्ट-शर्किट होते ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी ने तत्काल इसकी जानकारी अपने अधिकारियों को दी। इसके बाद तुरंत सिम्स की बिजली बंद कर दी गई और घटना की जानकारी प्रभारी डीन डॉ. नायक, प्रभारी सिम्स अधीक्षक डॉ. पुनीत भारद्वाज को दी गई। बिजली बंद करने के बाद जिस इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में आग लगी थी उसकी वायरिंग को काट कर दूसरी वायरिंग फिट की गई।

22 जनवरी को सिम्स के इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में शार्ट-शर्किट के बाद निकली चिंगारी ने आग पकड़ ली थी जिससे एनआईसीयू में काला धुआं भर गया था तथा शिफ्टिंग के दौरान पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी।

पहले हुई घटना तो किए थे बड़े-बड़े दावे, पर नहीं लिया सबक

सिम्स के इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में 22 जनवरी की दोपहर शार्ट-शर्किट होने से आग लग गई थी। आग का पता तब चल पाया था जब चारों तरफ काला धुआं भर गया था। सबसे ज्यादा परेशानी एनआईसीयू में ही हुई थी क्योंकि इसमें काला धुआं भर गया था। उस दिन भी यहां 22 नवजात शिशु भर्ती थे। जिन्हें सिम्स के कर्मचारियों ने कांच तोड़कर बाहर निकाला था।

नवजात शिशुओं को बाहर निकालने के बाद जिला अस्पताल तथा प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। लेकिन पहले से ही गंभीर इन बच्चों में से 5 ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद सिम्स प्रबंधन ने बिजली व्यवस्था सही कराने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की थीं, लेकिन लगभग दो माह बाद भी सिम्स की बिजली व्यवस्था सही नहीं की जा सकी है।

सुरक्षित नहीं एनआईसीयू 

इलेक्ट्रॉनिक पैनल बोर्ड में शार्ट-शर्किट होने के बाद जहां सिम्स के जिम्मेदार यह कहते रहे कि वायरिंग सही करवा दी गई है। लेकिन एनआईसीयू के दरवाजे के बगल से लगे स्विच बोर्ड का पहले नम्बर का प्लग दबाया तो इसमें से ऐसी आवाज निकली जैसे किसी ने छोटा पटाखा चलाया हो। आवाज होते ही सुरक्षाकर्मी ने तत्काल इसे बंद करवा दिया। इससे पता चलता है कि सिम्स का एनआईसीयू पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है।

प्रस्ताव शासन को भेजा है

डॉ. पुनीत भारद्वाज, प्रभारी अधीक्षक, सिम्स ने कहा है कि सिम्स में जब आग लगी थी उसके बाद एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। इस प्रस्ताव में बिजली व्यवस्था सही करने के लिए जो उपकरण व सामान चाहिए उसकी मांग की गई है। लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। सोमवार की शाम सिर्फ शार्ट-शर्किट हुआ था उसे सही करवा दिया गया है।

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