नान घोटाला: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मिलने के बाद कहा, "निष्पक्षता से करें जांच" - गोंडवाना एक्सप्रेस
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नान घोटाला: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मिलने के बाद कहा, “निष्पक्षता से करें जांच”

बिलासपुर (एजेंसी) | नान घोटाले (नागरिक आपूर्ति निगम) में करीब 36 हजार रुपए की गड़बड़ी मामले में राज्य सरकार ने मंगलवार को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार और एससीबी इस तरह जांच करें कि लोगों को निष्पक्षता का भरोसा हो। अब इस मामले पर 12 मार्च को सुनवाई होगी।

नागरिक आपूर्ति निगम में करीब 36 हजार रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव, संस्था हमर संगवारी, वीरेंद्र पांडेय,भीष्म नारायण मिश्रा की जनहित याचिकाओं और आईएएस अनिल टुटेजा की अपील पर एक साथ सुनवाई हो रही है। मंगलवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की तरफ से मामले की जांच पर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, इसमें बताया गया कि नान के मैनेजर रहे शिवशंकर भट्‌ट से 113 पेज जब्त किए गए थे, इसमें से सिर्फ 6 पेज के आधार पर जांच की गई थी।

नई एसआईटी पूरे 113 पेज के आधार पर जांच कर रही है। वहीं, एक अन्य कर्मचारी बारीक से 127 पेज जब्त किए गए थे, पूरे 127पेजों के आधार पर जांच की जा रही है। याचिकाकर्ता एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव ने एक अन्य आरोपी डीके शर्मा के आवेदन पर खराब चावल की खरीदी की दोबारा जांच को विरोध करते हुए कहा कि एफसीआई इसकी जांच करा चुका है, इसमें गुणवत्ताहीन चावल खरीदने की पुष्टि हुई है, इसकी दोबारा जांच नहीं कराई जा सकती। संवैधानिक कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच हो सकती है।

वहीं, संस्था हमर संगवारी की तरफ से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि याचिका वापस नहीं ली जा रही है, हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं। अब इस मामले पर 12 मार्च को अगली सुनवाई होगी।  क्या है मामला  छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के रायपुर स्थित मुख्यालय समेत आसपास के जिलों में पदस्थ करीब डेढ़ दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के दफ्तरों और आवास पर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने 12 फरवरी 2015 को एक साथ छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान कुल 3 करोड़ 43 लाख 96हजार 965 रुपए नगद बरामद हुए। करीब सभी अधिकारी- कर्मचारी से लाखों रुपए नगद, संपत्ति, एफडी, बीमा समेत अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए। मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए 27 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद इसमें से 16 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत की गई। दो आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के खिलाफ तो सरकार ने खुद ही अभियोजन की मंजूरी दी है। टुटेजा जहां नान के एमडी थे, वहीं, शुक्ला विभाग के सचिव थे।

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