Chhattisgarh Politics

झीरम कांड: जांच आयोग के फैसले के विरोध में राज्य सरकार की याचिका को हाइकोर्ट ने खारिज किया

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बुधवार को झीरम घटना मामले में राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से न्यायिक जांच आयोग के फैसले के विरोध में याचिका लगाई गई थी। हाइकोर्ट ने कहा कि आयोग अपना फैसला लेने में सक्षम है और हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। न्यायिक आयोग ने राज्य शासन के 5 गवाहों के आवेदन को निरस्त कर दिया था। सरकार की ओर से यह गवाही देने के लिए आना चाहते थे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बेंच में हुई।

दोबारा सुनवाई की मांग से भी इनकार किया, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

बस्तर की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन रैली में नक्सलियों ने हमला कर दिया था। हमले में महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल सहित कई बड़े कांग्रेसी नेताओं और पुलिस जवानों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पूववर्ती भाजपा सरकार ने जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग की अंतिम सुनवाई 11 अक्टूबर 2019 को हुई थी। इस दिन शासन के तरफ से नक्सल ऑपरेशन के डीआईजी पी. सुंदरराज की गवाही हुई।

इसके बाद आयोग में राज्य शासन की ओर से कांग्रेस के दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा, बेटी तूलिका कर्मा, डॉ. चुलेश्वर चंद्राकर, हर्षद मेहता व सुरेंद्र शर्मा के गवाही के लिए आवेदन दिया था। साथ ही गुरिल्लावार स्कूल नक्सली वार फेयर के अधिकारी बीके पोनवार को टेक्निकल एक्सपर्ट के रूप में बुलाए जाने के आवेदन और मौखिक तर्क रखे जाने के आवेदन दिए थे। इन सभी आवेदनों को आयोग ने निरस्त कर दिया। राज्य सरकार ने इस आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी।

मामले को पहले हाइकोर्ट जस्टिस पी. सेम कोशी की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य शासन हाइकोर्ट चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में अपील याचिका दायर की। मामले में 20 जनवरी को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में अंतिम बहस हुई। दोनों पक्षों द्वारा तर्क और बहस को सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया था। महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने कहा कि तकनीकी आधार पर याचिका अस्वीकार हुई है। राज्य सरकार डिवीजन बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

Leave a Reply