Chhattisgarh

बिलासपुर हाईकोर्ट: छत्तीसगढ़ के रायपुर में बनने वाले जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के निर्माण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

छत्तीसगढ़ के रायपुर में बनने वाले जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के निर्माण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। सुनवाई पूरी होने तक यह आदेश यथावत लागू रहेगा। पार्क का निर्माण कृषि उपज मंडी की जमीन पर होना है। इसके खिलाफ लगाई गई याचिका में आवंटित भूमि आदेश को नियम विरुद्ध बताया गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में हुई।‌

धरसींवा के पूर्व विधायक और कृषि उपज मंडी समिति रायपुर के पूर्व अध्यक्ष देवजीभाई पटेल ने अधिवक्ता किशोर श्रीवास्तव, आशुतोष पांडेय, हिमांशु सिन्हा, शशांक ठाकुर और एवी श्रीधर के जरिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कृषि उपज मंडी रायपुर में सर्वसुविधायुक्त जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क की स्थापना के लिए आवंटित भूमि 11 जून 2020 के आदेश को विधि विरुद्ध बताया।

याचिका में कहा- रातों-रात जारी कर दिया गया आदेश

  • याचिका में कहा गया कि मंडी समिति की जमीन 1975 में किसानों ने खरीदी थी। उसका भूमि स्वामी हक कृषि उपज मंडी रायपुर को प्राप्त है।
  • कृषि उपज मंडी अधिनियम के तहत समिति की जमीन सिर्फ मंडी के प्रयोजन के लिए ही उपयोग में लाई जा सकती है। किसी अन्य प्रयोजन में उपयोग नहीं हो सकती।
  • 11 जून 2020 को एक ही दिन में राज्य शासन ने 5 से 6 एजेंसियों को निर्देशित करते हुए कृषि उपज मंडी अधिनियम के विपरीत पार्क के‌ लिए भूमि आवंटित की है।
  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शाम 6 बजे विभागीय अधिकारियों की बैठक कर मंडी समिति की जमीन लेने का निर्णय लिया गया।
  • उसी दिन रात में 8 बजे के बाद मंडी बोर्ड, सीएसआईडीसी, मंडी समिति रायपुर, राजस्व सचिव, संचालक उद्योग और कलेक्टर रायपुर को जमीन अधिग्रहण के निर्देश जारी किए गए।
  • सभी ने रात में ही पत्राचार करते हुए भूमि अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया। साथ ही रात में ही भूमि को उद्योग विभाग को कब्जा दिया गया।

कोर्ट ने मामले को गंभीर माना, होगी रेगुलर सुनवाई

वहीं, शासन की ओर से महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने कहा कि विधि के अनुरूप आदेश पारित किया गया है। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही रेगुलर सुनवाई के लिए याचिका को नियत करते हुए समिति की जमीन पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी। कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई तक यह आदेश पारित किया गया है।

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