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पीएससी भर्ती में बड़ा विवाद: प्रदेश के मूल निवासी को 5 वर्ष लेकिन यहीं के शासकीय कर्मी को 3 वर्ष की ही छूट

पीएससी ने 26 नवंबर को 171 पदों पर राज्य सेवा परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी किया जिसके आवेदन 31 दिसंबर तक ऑनलाइन भरे जाएंगे, लेकिन अंतिम तिथि आने से पहले ही आयु सीमा में छूट को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। पीएससी ने इन भर्तियों में मूल निवासियों को आयुसीमा में 5 वर्ष की छूट तो दी है, लेकिन इस छूट से शासकीय सेवकों को वंचित कर दिया गया है।

पीएससी का तर्क है कि शासन की नीति के अनुसार प्रदेश के मूल निवासी होने के बावजूद शासकीय सेवकों को आयु सीमा में तीन साल की ही छूट दी जाएगी। आयुसीमा 35 वर्ष की है, अर्थात शासकीय सेवकों की अधिकतम आयु 38 वर्ष तय कर दी गई है, जबकि मूल निवासियों के लिए यह 40 वर्ष होगी। इस वजह से शासकीय सेवकों के 400 से ज्यादा आवेदन रिजेक्ट होने की सूचना है और इस मुद्दे पर बवाल मच गया है कि शासकीय सेवक छत्तीसगढ़ के हैं, तब उन्हें 5 वर्ष की छूट क्यों नहीं दी जा रही है?

इधर, पीएससी ने इस मामले में मध्यप्रदेश के 1973 के सर्कुलर का हवाला दिया है, जिसमें शासकीय सेवकों के लिए आयु सीमा में 35 वर्ष पर 3 वर्ष की छूट का प्रावधान है। इस नियम को अभ्यर्थियों ने ये कहकर खारिज किया है कि मध्यप्रदेश का कोई नियम छत्तीसगढ़ में लागू नहीं है।

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