पिछली सरकार की एक और योजना बंद, गांवों के बजाय शहरों में खर्च किए 2400 करोड़, डीएमएफ कमेटियां भंग, जांच बिठाई - गोंडवाना एक्सप्रेस
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पिछली सरकार की एक और योजना बंद, गांवों के बजाय शहरों में खर्च किए 2400 करोड़, डीएमएफ कमेटियां भंग, जांच बिठाई

रायपुर (एजेंसी) | भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली नई सरकार ने भाजपा की पिछली सरकार की एक और योजना बंद कर दी। यह योजना है डीएमएफ, यानी जिला खनिज विकास निधि की। सभी जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड कमेटियां बनाकर तमाम खदानों को इनके जिम्मे दिया गया था।

इस योजना का उद्देश्य था कि खनिज पट्टे से मिलने वाले फंड से ये कमेटियां खदानों के आसपास के गांवों का विकास करें। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खनिज विभाग की समीक्षा में पाया कि गांवों के बजाय इस राशि से शहरों में फिजूल के निर्माण कार्य हो रहे हैं। पिछले तीन सालों में इस फंड में राज्यभर से करीब 3000 करोड़ रुपए आए। इसमें से 2400 करोड़ रुपए निर्माण कार्यों में लगा दिए गए।राजधानी में नालंदा परिसर, मरीन ड्राइव समेत ऐसे दर्जनों काम इसी राशि से कराए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कमेटियों को भंग कर नए सिरे से जांच के निर्देश दिए हैं।




गावों के विकास में लगाया जाना था फंड

केंद्र सरकार ने 2015 में नई खनिज नीति जारी की तब कलेक्टरों की अध्यक्षता में डीएमएफ कमेटियां बनाने की व्यवस्था की थी। तय किया कि खनिज रायल्टी और लाइसेंस फीस की रकम कमेटियों को दी जाए। मकसद था कि खदानों से लगे गांवों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के अलावा सड़क, पानी, बिजली व जरूरी सुविधाओं पर यह फंड खर्च किया जाए। स्थानीय बेरोजगारों को काम भी देना था।

भाजपा सरकार के कार्यकाल में बीते तीन सालों में इस फंड से 2400 करोड़ रुपए शहरों के निर्माण कार्यों में खर्च कर दिए गए। मुख्यमंत्री बघेल ने खनिज विभाग की समीक्षा की तो खुलासा हुआ कि राशि का उपयोग खदान क्षेत्र के विकास के बजाय बड़े शहरों में फैशनेबल निर्माण कार्यों पर किया गया। उन्होंने सभी जिलों की कमेटियों को तत्काल भंग करने के निर्देश दिए और कहा कि डीएमएफ से हुए खर्चों की दोबारा जांच की जाए।

राजधानी में मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन समेत दर्जनों काम इसी फंड से

मुख्यमंत्री को बताया गया कि रायपुर में तेलीबांधा मरीन ड्राइव, नालंदा परिसर, ऑक्सीजोन और गौरव पथ की कलाकारी पर इसी फंड से करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। दंतेवाड़ा, बीजापुर में एजुकेशन हब भी बनाया गया है। यही नहीं, एक-दो जिलों में अफसर कालोनी में स्वीमिंग पुल और आला अफसरों के लिए लाखों की कारें तक खरीद ली गईं।

सीएम ने इसे फंड के दुरुपयोग मानते हुए गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर खनिज विभाग ने सभी जिलों की डीएमएफ कमेटियों को तत्काल भंग कर दिया है। इन्हें मिलने वाली राशि अब राज्य सरकार के खजाने में जमा होगी।



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