‘नंदराज’ को बचाने के लिए आंदोलन: तीर-धनुष जैसे परंपरागत हथियारों के साथ 200 से ज्यादा गांवों के हजारों आदिवासी तीसरे दिन भी डटे रहे

दंतेवाड़ा (एजेंसी) | नंदराज पहाड़ को बचाने के लिए दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के करीब 200 गांव से आए तीन हजार से ज्यादा आदिवासियों का आंदोलन बैलाडीला में रविवार को तीसरे दिन भी शांतिपूर्वक जारी रहा। ये आदिवासी अपने परंपरागत हथियारों और वाद्ययंत्रों के साथ पहुंचे हैं और चेकपोस्ट को घेरकर नाच-गाने के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासी देवताओं का पहाड़ मानकर ‘नंदराज’ की पूजा करते हैं।

खनन से पहले काटे जाएंगे 25 हजार पेड़

खनन से पहले काटे जाएंगे 25 हजार पेड़ बैलाडीला की 13 नंबर की खदान नंदराज पहाड़ पर है। पहाड़ तक पहुंचने और खनन शुरू करने के लिए 50 मीटर चौड़ी और छह किमी लंबी सड़क बनेगी। इसके लिए 25,400 पेड़ काटे जाएंगे।

राजनेताओं का भी समर्थन मिल रहा है 

पूर्व सीएम अजीत जोगी ने आदिवासियों के समर्थन में नंदराज पहाड़ पर पिट्‌टे मेटा  (पिटोड़ रानी) की पूजा की। बस्तर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम शाह मंडावी भी आदिवासियों के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने कहा कि हक के लिए लड़ाई जारी रहेगी। बता दें कि खदान के निजीकरण के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के समर्थन के साथ आदिवासियों को कांग्रेस, भाजपा, सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिल रहा है।

मांगे नहीं सुनी गई तो सरकार के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा

बस्तर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम शाह मंडावी ने कहा कि किसी भी हाल में हिरोली स्थित पिटोम मेटा पहाड़, जिसमें की सम्पूर्ण बीजापुर दंतेवाड़ा और सुकमा के आदिवासियों के देव स्थल है, पर किसी भी कम्पनी को खनन करने नही दिया जाएगा। मंडावी ने अपने देव स्थल को बचाने के लिए आंदोलनरत आदिवासियों से कहा कि इस मसले पर प्रदेश और केंद्र की सरकार से बात करेंगे। यदि केंद्र और राज्य सरकार इनकी बात नही सुनती है तो वे आपने ही सरकार के खि़लाफ़ मोर्चा खोलेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में बस्तर के आदिवासियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने नही दिया जाएगा।

शहर और प्रोजेक्ट बंद की तैयारी, एनएमडीसी में उत्पादन ठप, रोज 7-8 करोड़ का नुकसान

अनिश्चितकालीन हड़ताल में सूत्रों के हवाले की खबर है कि आदिवासी बचेली शहर और एनएमडीसी प्रोजेक्ट को भी बंद करने की तैयारी चल रही है. किसी भी वक्त इसका ऐलान किया जा सकता है। बस्तर में डिपॉजिट 13 नंबर की खदान अडानी को दिए जाने का आदिवासियों का विरोध आज लगातार तीसरे दिन भी जारी है। एनएमडीसी दफ्तर का घेराव करने हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासी जमे हुए है और जमकर विरोध जता रहे हैं।

ये है पूरा मामला

बता दें कि बैलाडीला के 13 नम्बर खदान में लगभग 350 मिलियन टन लौह अयस्क भंडार मौजूद होने की संभावना है। इसके उत्खनन का ठेका अडाणी की कंपनी एईएल को दिया गया है, जिस स्थान पर यह 13 नंबर खदान मौजूद है उस पहाड़ को आदिवासी अपना आराध्य मानते हैं। इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ यहां के घने जंगलों को उजाड़ दिया जाएगा बल्कि यहां रहने वाले आदिवासियों को भी विस्थापित होना पड़ेगा। आदिवासी लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं। उनका यह विरोध अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।

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