Chhattisgarh

नक्सलियों को मिला हथियारों का नया बाजार, केरल और तमिलनाडु से आए गोला-बारूद के दम पर जवानों पर किया था हमला

जगदलपुर | नक्सलियों के पास अब असलहे की कोई कमी नहीं है। पिछले दो-तीन साल से गोलियाें, बम की कमी से जूझ रहे नक्सलियों को अब इसकी सप्लाई के लिए नई चेन मिल गई है। इस बार नक्सलियों ने गोला-बारूद के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु जैसा नया बाजार ढूंढ़ लिया है। शनिवार को सुकमा जिले में काेराज डाेंगरी के पास नक्सलियों ने जब जवानों को एंबुश में फंसाकर बड़ा हमला किया तो यहीं से आये गोला-बारूद का उपयोग किया गया थ।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक यह है कि अभी नक्सलियों को असलहे की खेप जो मिली है वह पहले से ज्यादा बेहतर है। नक्सलियों के पास बड़ी मात्रा में गोला-बारूद आ गया है, इसकी भनक सुरक्षा एजेंसियों को कुछ दिनों पहले ही लगी थी। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार बीजापुर के मनकेली में रहने वाले नक्सली दीपक उर्फ चंदू की गिरफ्तारी चेन्नई से की गई थी। चंदू की चेन्नई में मौजूदगी खुफिया एजेंसियों के मन में कई शंका पैदा कर रही थी।

इसी बीच नक्सलियों ने टोंडामरका और हिरपल्ली में जवानों पर दो बड़े हमले किये। दोनों जगह नक्सलियों ने जवानों पर दो-दो हजार से ज्यादा राउंड फायर किये। हालांकि यहां नक्सली फोर्स को नुकसान नहीं पहुंचा पाये, लेकिन जिस अंदाज में गोलियों की बौछार की गई वह भी खुफिया एजेंसियों के लिए शक का एक बड़ा कारण बना।

खुफिया एजेंसियों ने हाल में हुई मुठभेड़ में नक्सलियों की ओर से उपयोग किये गए गोला-बारूद का हिसाब निकाला। इसमें पता चला कि बीजापुर के पामेड़ में जिस मुठभेड़ में तीन जवान शहीद हुए थे वहां भी नक्सलियों ने भारी मात्रा में गोलाबारी की है। चूंकि नक्सलियों के पास हथियारों की बेहद कमी थी और वे मुठभेड़ के दौरान तीर तक का उपयोग करने लगे थे।

इसके बाद इतनी मात्रा में गोला बारूद का कनेक्शन ढूंढ़ना शुरू किया गया। पिछले सप्ताह नक्सलियों ने पुसपाल-बोदली मार्ग पर हमला किया था, यहां दो जवान शहीद हुए थे। यहां सर्चिंग में यूबीजीएल के जिंदा शेल और 13 जिंदा बम बरामद किये गये थे। इस बीच जब तक सुरक्षा एजेंसियां ये सारी कड़ियां मिला पातीं, उससे पहले शनिवार को कसालपाड़ के पास हमला हो गया और इसमें 17 जवान शहीद हो गये।

नक्सलियों की मिलिट्री विंग का चीफ रह चुका है केशव

नक्सलियों को लंबे समय तक असलहे की सप्लाई उत्तर प्रदेश और बिहार से होती रही है। नेपाल के रास्ते आने वाले हथियार यहीं से होते इनके पास पहुंचते रहे हैं। हाल ही में इन इलाकों में सुरक्षाबलों ने काफी कड़ाई बरती थी। यही कारण था कि नक्सलियों के पास एके-47, एसएलआर जैसे हथियार तो थे लेकिन गोला-बारूद नहीं था। इस बीच नक्सलियों के कनेक्शन तमिलनाडु और केरल की तरफ बढ़े। तमिलनाडु में हुईं गिरफ्तारियां यह आशंका मजबूत करती हैं कि वहीं से हथियारों की डीलिंग हुई।

खुफिया विभाग के सूत्र बताते हैं कि असलहे की सप्लाई के रास्ते खुलने के पीछे बड़े नक्सली का नाम भी है। अभी नंबला केशव राव उर्फ बासवराज ने गणपति की जगह सीपीआई माओविस्ट के महासचिव का पद संभाला है। केशव इससे पहले नक्सलियों की मिलिट्री विंग का चीफ था। इस दौरान उसके संपर्क कई गोला-बारूद के सप्लायरों से रह चुके हैं। महासचिव बनने के बाद भी केशव मिलिट्री चीफ की तरह मिलिट्री विंग को मजबूत कर रहा है।

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