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व्यक्ति विशेष: हीरारतन थवाईत, जिन्होंने अकेले ही नदी तट पर 7 एकड़ बंजर जमीन को 5 सौ पौधे रोप कर बना दिया हराभरा

कसडोल (एजेंसी) | मैं दुनिया बदल सकता हूं मुहावरे को ग्राम कटगी में एक गरीब किसान ने चरितार्थ कर दिया है। उन्होंने गांव में हरियाली ही हरियाली ला दी है। उन्होंने नदी तक के डुबान क्षेत्र में बंजर पड़ी 7 एकड़ जमीन पर लगाए हैं 5 सौ पौधे, जिसमें 20 दिन से 20 साल उम्र के पेड़ शामिल हैं। पर्यावरण तो शुद्ध हुआ ही है। इस एरिया को देखने में मन बाग-बाग हो जाता है। उस व्यक्ति की जितनी प्रंशसा की जाए कम है।

कसडोल से गिधौरी मुख्य मार्ग में 12 किमी दूरी पर जोक नदीं के तट पर बसा ग्राम कटगी है, जिसकी आबादी लगभग 4 हजार है। इसी गांव गरीब किसान 64 साल के हीरारतन थवाईत 20-25 सालों से लगातार पौधरोपण कर रहे हैं। उन्होंने जोक नदी एवं कटगी बस्ती के बीच बाढ़ आने पर डुबान क्षेत्र नदी किनारे पौधरोपण कर हरियाली ला दी है, जिसे देखकर मन आनंदित हो उठता है।

25 सालों में 500 पौधे रोपे

शुरुआत में कुछ बबूल के बीज छिड़ककर बबूल भी लगाए एवं नीम के पौधे लगाए, ताकि लोगों को दातून सहज ही उपलब्ध हो सके। पौधरोपण का काम लगातार 20-25 सालों से चला आ रहा है। पौधरोपण का यह क्षेत्र बढ़ते-बढ़ते अब 7 एकड़ में हो गया है, जिसमे 500 से भी ज्यादा पेड़ हैं। इस 500 पेड़ में से 20 दिन से 20 साल उम्र तक के पेड़ हैं।

गांव के घरों से पौधे मांगकर रोपने की शुरुआत की

हीरारतन ने बताया कि जब मैं 35 साल का था, उस समय कटगी के जोक नदी किनारे एक भी पेड़ नहीं था। जब हम किसी के दशगात्र कार्यक्रम में जाते थे तो छाया नहीं मिल पाती थी। नदी का किनारा पूरा बंजर पड़ा था। इसी जमीन पर उस समय घरों में पूजा करने के लिए रखे गए बरगद और पीपल के पौधों को मांग कर रोपने लगा। आज लगभग 500 पेड़ है।

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