बंगरसुता में 700 की आबादी, गांव जाने का रास्ता नहीं, यहां हर घर से शिक्षक, डॉक्टर और इंजीनियर

रायगढ़ (एजेंसी) | गांव में पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है फिर भी शिक्षा की राह पर चलकर यहां के ग्रामीण मिसाल बन गए। जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बंगरसुता की आबादी 700 है। ढाई सौ परिवार वाले गांव में ज्यादातर आबादी आदिवासी व पनिका (महंत) समाज के लोगों की है। शिक्षा को लेकर लोग इतने जागरूक हैं कि हर घर का एक सदस्य सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में अच्छे पद पर नौकरी कर रहा है।

आदिवासी बाहुल्य गांव में शिक्षा सबसे पहले

ग्रामीण नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं ताकि वे भी भविष्य में अच्छी नौकरी पा सकें। आदिवासी गांव बंगरसुता के बच्चे पढ़ने के लिए नदी-नाले पारकर दूसरे गांव कोरबा के रामपुर के अंग्रेजी माध्यम स्कूल जाते हैं। 80 प्रतिशत से अधिक लोग शिक्षित हैं, उपसरपंच खुद एमए पास हैं। कुछ बच्चे जान पर खेलकर पढ़न कुड़ेकेला गांव जाते थे।




कोटवार मोहन दास (68 साल) बताते हैं कि पहले गांव के ठाकुर राम राठिया नदी, नाले पार कर स्कूल गए और पढ़ाई की, टीचर बने। उन्हें देख गांधी राम राठिया और मांझी राम राठिया भी प्रेरित हुए। इसके बाद गांव में प्राइमरी और बाद में मिडिल स्कूल खुलवाया। यहां के रहवासी डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस, फारेस्ट, एसईसीएल, शिक्षा, पंचायत, रेलवे, पीडब्ल्यूडी, राजस्व, समेत प्राइवेट संस्थानों में कार्यरत हैं।

अभी गांव में ये लोग हैं प्रमुख पदों पर

ग्रामीणों के मुताबिक 100 से भी अधिक लोग अभी पुलिस, चिकित्सा, शिक्षा, राजस्व और फारेस्ट समेत अन्य विभागों में अपनी सेवा दे रहे हैं। गांव के विक्रम राठिया खरसिया सिविल अस्पताल में डॉक्टर, जगेश्वर राठिया पुलिस में एसआई रायपुर में पदस्थ, अनूप महंत एसईसीएल, अर्जुन महंत बाल्को, विदेश राठिया रेलवे में इंजीनियर जबलपुर, पंकज राठिया पुलिस, रमेश कुमार राठिया शिक्षक, सियाराम राठिया शिक्षक, श्रीराम राठिया शिक्षक, पूर्णिमा राठिया शिक्षक, गीता राठिया शिक्षक, लंबोदर राठिया शिक्षक हैं।

शिक्षा के लिए करते हैं मदद

गांव में तीन समितियां बनाई गई है। जिसमें मिलन चौक, बजरंग चौक और महादेव चौक समिति है। नौकरी करने वाले सभी लोग पारंपरिक और धार्मिक उत्सव में आर्थिक सहयोग करते हैं। गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई या इलाज के लिए भी भरपूर मदद करते हैं। 70 साल के मछींदर राम केंवट बताते हैं कि खरसिया सिविल अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर विक्रम राठिया की पढ़ाई में आर्थिक स्थिति बाधा बन रही थी। तब गांव वालों ने मिलकर मदद की ताकि वे एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकें।

बुजुर्गों को भी पढ़ाते हैं 

धरमजयगढ़ में बीएड कर रहे गांव के रामेश्वर राठिया का कहना है कि स्कूल में पढ़कर कॉलेज जाने वाले युवा साथियों को प्रतियोगिता परीक्षा, पुलिस भर्ती, बैंकिंग, सहित अन्य प्रतियोगिता परीक्षा के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि उन्हें सफलता मिले। सरकारी सेवा में जिले के साथ अन्य राज्यों में कार्यरत गांव के अफसर या कर्मचारी सरकारी महकमे में अच्छी वेकेंसी निकलते तो गांव के स्टूडेंट्स को जानकारी देते हैं, तैयारी को लेकर भी गाडइ करते हैं। जो युवा गांव के आसपास ही सरकारी स्कूलों में शिक्षक हैं। वे सामुदायिक भवन में बुजुर्गों को प्रौढ़ शिक्षा भी देते हैं।



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