अमेरिकी टूरिस्ट जॉन एलेन ने मरने से एक दिन पहले लिखा था, ‘जीसस मेरे साथ हैं। हो सकता है कि कल को मुझे गोली लग जाए या तीर लग जाए, कल फिर जाऊंगा’

पोर्ट ब्लेयर (एजेंसी) | 14 साल बाद अंडमान निकोबार के आईलैंड पर रहने वाले सेंटनल आदिवासी फिर सुर्खियों में हैं। वजह- उन्होंने आईलैंड पर पहुंचे अमेरिकी टूरिस्ट जॉन एलेन की तीर मारकर हत्या कर दी। इससे पहले सेंटनल 2004 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने आईलैंड के ऊपर से गुजर रहे भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर पर तीर बरसा दिए थे। करीब 60 हजार साल से दुनियाभर से कटकर इस आईलैंड पर रह रहे सेंटनल आदिवासियों के बीच 12 साल बाद बाहरी दुनिया का कोई व्यक्ति पहुंचा था।

इससे पहले 2006 में सैंटनल ने आईलैंड पर गलती से पहुंच गए 2 मछुआरों को भी मार दिया था। गुरुवार को जॉन एलेन का शव ढूंढने के लिए एक हेलीकॉप्टर भी आईलैंड के ऊपर पहुंचा। आदिवासियों ने उस पर भी तीर बरसा दिए। हालांकि इस बीच एक नोट सामने आया है, जो जॉन ने मौत से एक दिन पहले ट्रैवल डायरी में अपने माता-पिता के नाम लिखा था। इसमें लिखा है- ‘आप (जॉन के माता-पिता) सोचेंगे कि मैं पागल हूं। पर जो मैं कर रहा हूं, वही जीसस की इच्छा है। हो सकता है कि कल को मुझे गोली लग जाए या तीर लग जाए। इसके लिए जीसस या हमला करने वालों पर गुस्सा मत करना।




आज मैं मछुआरों की मदद से सेंटनल आदिवासियों वाले आईलैंड तक पहुंचा था। लोगों ने वहां जाने से मना किया था, लेकिन मैं अपनी बाइबिल लेकर आईलैंड पर उतर गया। जीसस मेरे साथ हैं। मेरे पहुंचते ही कुछ आदिवासियों ने मुझे घेर लिया। उनके हाथों में तीर-कमान थे। वो कुछ बोल नहीं रहे थे, बस मेरी ओर बढ़ते आ रहे थे। मैंने उनसे कहा- मैं आपसे प्यार करता हूं। जीसस आपसे प्यार करते हैं। मेरी बात पूरी होने से पहले ही 10 साल के बच्चे ने मुझे पहला तीर मारा। तीर मेरी बाइबिल पर लगा। मैं वहां से भागा। वे कुछ चिल्लाते हुए मेरे पीछे भागे। कुछ तीर भी चलाए।

उनमें से एक शख्स लीडर जैसा लग रहा था। बाकी लोग उसकी बात मानकर मुझ पर हमला कर रहे थे। मुझे कुछ चोटें लगीं, पर मैं बचकर निकल आया। कल फिर जाऊंगा।’ ये नोट लिखने के अगले दिन जॉन फिर आईलैंड पर गए। इस बार वापस नहीं लौटे। बाद में मछुआरों ने देखा कि आदिवासी शव के गले में रस्सी डालकर, खींचते हुए ला रहे थे।



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