Chhattisgarh

आदिवासियों ने रोका खदान का रास्ता कहा-देवताओं का पहाड़ नष्ट नहीं होने देंगे, दिनभर काम बंद

दंतेवाड़ा (एजेंसी) | किरंदुल के बैलाडीला के डिपॉजिट 13 नंबर खदान (नंदराज पहाड़) पर खुदाई शुरू किए जाने का ठेका देने के विरोध में शुक्रवार को आदिवासियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। नंदराज पहाड़ को आदिवासी देवों का स्थान मानकर पूजते आए हैं। इस पर खनन की खबर मिलने के बाद से आदिवासियों में नाराजगी थी। पहले से घोषित आंदोलन को मूर्त रूप देने के लिए संयुक्त पंचायत संघ की अगुवाई में सुबह 8 बजे से आदिवासी समाज ने प्रदर्शन शुरू किया।

प्रदर्शनकारियों ने खदानों की ओर जाने वाले तीनों रास्ते जाम कर दिए। इससे सुबह की पाली के कर्मचारी अंदर नहीं जा सके। लंबे समय बाद खदान और एनएमडीसी प्लांट में काम बंद रहा। एसपी अभिषेक पल्लव ने इसे नक्सल प्रायोजित प्रदर्शन बताया है। दरअसल दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाॅजिट 13 नंबर खदान अडानी को दिए जाने का आदिवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है। आदिवासियों ने कमर कस ली है।

जन संघर्ष समिति की अगुवाई में हुआ आंदोलन 

खदान को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति ने आंदोलन छेड़ा है। समिति के सचिव राजू भास्कर ने आरोप लगाया कि छलपूर्वक फर्जी ग्रामसभा का अनुमोदन करवा लिया गया है, ताकि खदान निजी हाथों में सौंपा जा सके। डिपॉजिट 13 में खनन के लिए जिस सैकड़ों एकड़ जंगल को काटने की तैयारी की गई है, उसमें आदिवासियों के देवी देवताओं का निवास है, आदिवासी किसी भी कीमत पर इसे उजड़ने नहीं देंगे।

अचानक अडानी को सौंपने की तैयारी

बैलाडीला के डिपाजिट 13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण क्लियरेंस दिया है। जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार की सीएमडीसी को संयुक्त रूप से उत्खनन कार्य करना था। इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत संयुक्त उपक्रम एनसीएल का गठन किया गया था, लेकिन बाद में इसे निजी कंपनी अडानी एंटरप्राइजेस लिमिटेड को 25 साल के लिए लीज हस्तांतरित कर दिया गया। डिपाजिट 13 के 315.813 हेक्टेयर रकबे में 250 मिलियन टन लौह अयस्क होने का पता जांच में लगा है। इस अयस्क में 65 से 70 फीसदी आयरन की मात्रा पायी जाती है।

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