मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का किसानो को सौगात, टाटा के लिए अधिग्रहित 10 गांवों के 1709 किसानों की 5000 एकड़ जमीन होगी वापस - गोंडवाना एक्सप्रेस
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का किसानो को सौगात, टाटा के लिए अधिग्रहित 10 गांवों के 1709 किसानों की 5000 एकड़ जमीन होगी वापस

रायपुर (एजेंसी) | बस्तर जिले के चित्रकोट विधानसभा में टाटा स्टील प्लांट के लिए जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ था, उन किसानों को बगैर शर्त के जमीन वापस होगी। सोमवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके आदेश जारी किए। इस जमीन की वापसी की मांग किसान लंबे समय से कर रहे थे। टाटा ने प्लांट के लिए 10 गांव के 1709 किसानों की 5000 एकड़ जमीन का 2008 में अधिग्रहण किया गया था।

मंत्री परिषद की आगामी बैठक में प्रस्ताव लाने के निर्देश

कांग्रेस ने सरकार बनने पर इस जमीन को वापस कराने का वादा किया था। सोमवार को चित्रकोट विधायक दीपक बैज ने मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल से मुलाकात करके किसानों की जमीन का मुद्दा उठाया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अफसरों से इसके लिए जरूरी प्रक्रिया जल्द पूरी करने और मंत्री परिषद की आगामी बैठक में प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए हैं।

10 साल में भी शुरू नहीं हुआ कार्य

टाटा स्टील प्लांट के लिए लोहांडीगुड़ा ब्लाक के 10 गांवों में 2008 में जमीन अधिग्रहित की गई थी। लेकिन, 10 साल बीत जाने के बाद भी अब तक यहां कारखाना नहीं लग पाया है। टाटा कंपनी ने भी यहां से अपना बोरिया-बिस्तर भी समेट लिया है।




5 साल के भीतर प्लांट लगाना जरूरी

नियमानुसार औद्योगिक उपयोग के लिए अधिग्रहित कृषि भूमि पर 5 साल में काम शुरू करना जरूरी है। अधिग्रहण की तारीख से 5 साल तक परियोजना स्थापित नहीं की गई है तो वह जमीन किसानों को वापस की जाती है।

सिंगुर में भी टाटा को जमीन वापस करनी पड़ी थी

इससे पहले टाटा ग्रुप ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर में नैनो कार परियोजना लगाने के लिए अधिग्रहित की गई जमीन को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किसानों को वापस किया था।

कंपनी की यहां पर 997 एकड़ जमीन पर नैनो कार के निर्माण की परियोजना लगाने की योजना थी। बाद में राजनीतिक विरोध और भारी विरोध प्रदर्शन के बाद अक्टूबर 2008 में टाटा समूह ने नैनो फैक्टरी बंगाल से गुजरात के साणंद में स्थानांतरित करने की घोषणा कर दी थी।

इस फैसले का असर पुरे बस्तर जनमानस पर पड़ेगा

मुख्यमंत्री की शपथ के ठीक सातवें दिन किसानों को जमीन लौटाने का यह फैसला अप्रत्याशित है। यह नई सरकार की सोच को दर्शाता है। मुख्यमंत्री बनते ही भूपेश बघेल ने सबसे पहले यही बात कही थी कि नक्सल समस्या के समाधान के लिए पीड़ित पक्षों से बात करेंगे।

ऐसे में बस्तर के 10 से अधिक गांवों की जमीन वापस लौटाने का फैसला आदिवासियों का दिल जीतने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। निश्चित रूप से पूरे फैसले को अमल में लाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा ने बस्तर के मामले में एक नई नजीर पैदा की है।

भले ही फैसले का असर सिर्फ 10 गांवों पर पड़ेगा, किंतु यह मुद्दा समूचे बस्तर के जनमानस से जुड़ा था। तभी तो अधिग्रहित जमीन वापस लेने के लिए रह-रहकर वहां आंदोलन होते रहे हैं।



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