दादी की अस्थि विसर्जन कर रहे युवक की माँ के सामने ही खारुन नदी में डूबने से मौत - गोंडवाना एक्सप्रेस
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दादी की अस्थि विसर्जन कर रहे युवक की माँ के सामने ही खारुन नदी में डूबने से मौत

प्रतीकात्मक फोटो 

रायपुर (एजेंसी) | राजधानी में खारुन नदी के तट पर गुरुवार की सुबह करीब 6 बजे 21 साल के लाेहित राव नमक युवक की डूबने से मौत हो गई। हादसे के वक्त लोहित अपनी मां के साथ दादी की अस्थि विसर्जित कर रहा था। मां-बेटे ने अस्थियां विसर्जित कीं, फिर लोहित नहाने नदी में उतरा। तभी अचानक वह फिसलकर गहराई में चला गया और डूबने लगा। मां वहीं खड़ी थी। माजरा समझते ही वह बदहवास हो गई।




माँ ने मदद के लिए पुकारा तब तक हो चुकी थी देर

नदी के किनारे छटपटाते हुए वह मदद के लिए जोर-जोर से पुकारने लगी। तट पर मौजूद गोताखोर भागकर आए। लोहित को बचाने के लिए उन्होंने नदी में छलांग लगाई, लेकिन तब तक युवक पानी में समा चुका था। गोताखोरों ने उसे गहराई से ढूंढकर निकाला। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, वहां डाक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित किया। बेटे को अपने सामने मौत के मुुंह में जाते देखकर मां सदमें में चली गई। वह काफी देर तक कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी कि वे लोग कौन हैं और कहां से आए हैं?

दादी के मौत के बाद पोते की भी मौत, माँ सदमे में है

पुलिस ने लोहित के मोबाइल से उसका नाम और पता मालूम कर परिजनों को खबर दी गई। लोहित का परिवार पहले से शोक में डूबा था। उसकी मौत की खबर सुनते ही पूरे रिश्तेदार रायपुर आए। उस समय तक लोहित को अंबेडकर अस्पताल के चीरघर में शिफ्ट किया जा चुका था। शाम को पोस्टमार्टम के बाद उसका शव परिजनों के हवाले किया गया। लोहित की मां की स्थिति शाम तक सामान्य नहीं हुई थी। पुलिस की जांच में पता चला है कि तीन दिन पहले भिलाई नगर में लोहित की दादी का निधन हो गया था। उन्हीं की अस्थि विसर्जित करने के लिए लोहित अपनी मां के साथ आया था। दोनों मां-बेटे जल्दी घर लौटने के लिए सुबह-सुबह आ गए थे। बाद में लोहित की मौत के बाद पूरे रिश्तेदार आ गए।
तीन दिन पहले मृत दादी की अस्थि विसर्जित करने आया था।

तैरना नहीं था इसलिए वहीं नहा रहा था 

लोहित को तैरना नहीं आता था। वह तट के किनारे की नहा रहा था। नहाते समय उसका पैर फिसल गया। उसने संभलने की कोशिश की। पर वहां फिसलन ज्यादा होने के कारण वह अपने आप को संभाल नहीं सका। गहराई में जाते ही हाथ पांव छटपटाते हुए उसने मदद के लिए पुकारा। उसकी आवाज सुनकर ही मां को पता चला कि बेटा डूब रहा है।

दो मिनट की देरी में खत्म हो गई जिंदगी

लोहित की मां ने जब बेटे को बचाने के लिए चीखना शुरू किया तब गोताखोर वहां से दूर थे। कुछ पल तो उन्हें ये समझने में लगा कि महिला क्यों चिल्ला रही है। स्थिति समझने के बाद तीनों गोताखोर भागते हुए आए। दौड़कर आने से उनकी सांसें फूल गई थीं, इस बीच लोहित पानी में समा गया था। गोताखोरों को कुछ पल अपने आप को संभालने और ये पता लगाने में लगा कि लोहित किस जगह पर डूबा है। उसके बाद वे वहां कूदे। गहराई में जाकर उन्हें लोहित को निकालने में भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान लोहित काफी पानी पी गया और उसकी मौत हो गई।



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