कंपनी को लौटाए जाएंगे स्काई योजना के 6 लाख शेष मोबाइल, मजदूरों को मिलने वाले 1 लाख टिफिन हैं डंप - गोंडवाना एक्सप्रेस
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कंपनी को लौटाए जाएंगे स्काई योजना के 6 लाख शेष मोबाइल, मजदूरों को मिलने वाले 1 लाख टिफिन हैं डंप

रायपुर (एजेंसी) | भूपेश सरकार ने स्काई योजना बंद करने के बाद अब कंपनी से खरीदे गए मोबाइल उसे लौटाने की तैयारी कर ली है। मोबाइल करीब 6 लाख हैं। इसलिए सरकार ने कंपनी का करीब 1300 करोड़ रुपए का भुगतान रोक दिया है। स्काई पिछली भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। कनेक्टिविटी बढ़ाने और 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने के दावे के साथ इसे शुरू किया गया था।




विधानसभा चुनाव से पहले 29 लाख से अधिक हैंडसेट बांटे गए, 6 लाख माइक्रोमैक्स कंपनी के गोदाम में रखे हैं। साथ ही मनरेगा मजदूरों को मुफ्त में टिफिन देने की पंचायत विभाग की योजना भी अधर में है। इसके तहत ऐसे मजदूर जिन्होंने वर्ष 2016 में कम से कम 30 दिन काम किया हो चार डिब्बे वाला टिफिन मिलना था। इनकी संख्या करीब 10.85 लाख है।

खर्च करीब 1500 करोड़ रुपए होना था, प्रदेश की 50.15 लाख महिलाओं-युवतियों को मोबाइल दिए जाने थे

स्काय पिछली भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। कनेक्टिविटी बढ़ाने और 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने के दावे के साथ इसे शुरू किया गया था। सीएम बनते ही पहली बैठक में भूपेश बघेल ने मोबाइल वितरण बंद कर दिया। दूसरी ओर कंपनी कर्मचारी नई सरकार में योजना को नए स्वरुप में लाने की जुगत बिठा रहे हैं, लेकिन चिप्स और आईटी विभाग ने योजना को वाइंडअप मानते हुए कंपनी के बकाया पर फैसला करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार राज्य की ओर से शुरु में कंपनी को 200 करोड़ का पेमेंट किया गया था। चिप्स के अफसरों का कहना है कि यह राशि प्रोजेक्ट शुरु करने एडवांस के रुप में दी गई थी।

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि शेष बचे 6 लाख मोबाइल केंद्र सरकार को भेजे जाएं। क्योंकि, स्काय योजना में बस्तर आदि इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारत नेट योजना के तहत मोबाइल टाॅवर लगाने की राशि दी गई थी।

मजदूरों को मिलने वाले 1 लाख टिफिन हैं डंप

पिछली भाजपा सरकार ने टिफिन योजना के लिए 275 रुपए प्रति टिफिन की दर से 30 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। स्पलायर ने करीब 20 करोड़ रुपए का पेमेंट ले भी लिया। 22 अक्टूबर को जब योजना बंद की हुई तो करीब 1 लाख टिफिन जनपद पंचायतों के गोदामों में पड़े हुए हैं। कुछ टिफिन चुनाव आयोग की छापामार टीमों ने जप्त कर रखे हैं। इन टिफिन के उपयोग को लेकर नई सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है। हालांकि बकाया राशि का भुगतान रोक दिया गया है।



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