श्री “अटल” बिहारी वाजेपयी जी की 5 “अटल” फैसले, जिसने भारत की तकदीर बदल दी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आखिरी सांस ली। तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी वो ही शख्स हैं, जिसने दुनिया के नक्शे पर भारत को चमकाया. उन्होंने प्रधानमंत्री रहते कुछ ऐसे फैसले लिए, जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदल गई।

1. स्वर्णिम चतुर्भुज और ग्राम सड़क योजना (Goldern Quadrilateral & Pradhanmantri Gramin Sadak Yojna)

अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उनकी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं को देखा जाता है, जिसे उन्होंने लॉन्च किया था. इनमें स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शामिल हैं. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को हाईवे नेटवर्क से कनेक्ट किया. वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए गांवों को पक्की सड़कों के जरिए शहरों से जोड़ा गया. वाजपेयी सरकार के दोनों प्रोजेक्ट सफल रहे और देश को आर्थिक विकास में बड़ी मदद मिली.

2. निजीकरण (Privatisation)

अटल विहारी वाजपेयी व्यापार और उद्योग चलाने में सरकार की भूमिका कम करने के लिए प्रतिबद्ध थे. इसके लिए उन्होंने अलग से विनिवेश मंत्रालय का गठन किया. सबसे महत्वपूर्ण विनिवेश में भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) और हिंदुस्तान जिंक, इंडिया पेट्रोकेमिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और VSNL शामिल थे. वाजपेयी के इन फैसलों से भविष्य में सरकार की भूमिका तय हो गई. हालांकि, उनके इन फैसलों को लेकर उनकी सरकार की आलोचना भी हुई.




3. राजकोषीय घाटा कम किया (Reining in the fiscal profligacy)

वाजपेयी सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के उद्देश्य से वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम शुरू किया. इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बचत को बढ़ावा मिला. इसका नतीजा यह रहा है कि पब्लिक सेक्टर सेविंग्स वित्त वर्ष 2000 में GDP के -0.8 फीसदी की तुलना में वित्त वर्ष 2005 में बढ़कर 2.3 फीसदी तक पहुंच गई.

4. टेलिकॉम क्रांति (Telecom revolution)

वाजपेयी सरकार की नई टेलीकॉम पॉलिसी से भारत में टेलीकॉम क्रांति की शुरुआत हुई. इसमें उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक तय लाइसेंस फीस हटाकर रेवन्यू शेयरिंग की व्यवस्था शुरू की. भारत संचार निगम लिमिटेड का गठन भी नीति निर्माण और सेवा के प्रावधान को अलग करने के लिए बनाया गया था. दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय प्राधिकरण के निर्माण ने सरकार के नियामक और विवाद निपटान की भूमिकाओं को भी अलग कर दिया. वाजपेयी की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय टेलीफोनी में विदेश संचार निगम लिमिटेड के एकाधिकार को पूरी तरह खत्म कर दिया था. इससे भी भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली.

5. सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan)

6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त प्राथमिक शिक्षा देने के लिए एक सामाजिक योजना की शुरूआत की गई. 2001 में वाजपेयी सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान को लॉन्च किया. योजना लॉन्च होने के 4 सालों के अंदर ही स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में 60 फीसदी की गिरवाट देखने को मिली. यह भी देश की आर्थिक तरक्की के लिए बेहतर योजना साबित हुई.



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