श्री “अटल” बिहारी वाजेपयी जी व्यक्तित्व की 5 अटल गाथाये

दिल्ली | लंबी बीमारी के बाद पूर्व प्रधान मंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन हो गया।  राजधानी दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। गुर्दा नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण की शिकायत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को बीते 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था।

भारत के राजनैतिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में दर्ज है।  उनकी पहचान एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार व लेखक के रूप में होती है. वाजपेयी राजनीति को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हटकर ना सिर्फ अपनाया बल्कि उसको असल जीवन में जिया। वे एक कालजयी अपने नाम के अनुरूप ही अटल व अजातशत्रु थे।

उनके अटल व्यक्तित्व की 5 अटल गाथाये:

1. मध्यप्रदेश में जन्मे लेकिन उन्हें उत्तरप्रदेश से राजनैतिक लगाव था 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्यप्रदेश में एक शिक्षक थे। उनकी माता कृष्णा जी थीं। वैसे मूलत: उनका संबंध उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बटेश्वर गांव से है लेकिन, पिता जी मध्य प्रदेश में शिक्षक थे। अटल जी का जन्म वहीं हुआ।  लेकिन, उत्तर प्रदेश से उनका राजनीतिक लगाव सबसे अधिक रहा। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से वे सांसद रहे थे।

2. कवि बनाना चाहते थे लेकिन पत्रकारिता ही उनके राजनैतिक जीवन की आधारशिला बनी

वे एक कवि के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे. लेकिन, शुरुआत पत्रकारिता से हुई। पत्रकारिता ही उनके राजनैतिक जीवन की आधारशिला बनी। उन्होंने संघ के मुखपत्र पांचजन्य, राष्ट्रधर्म और वीर अर्जुन जैसे अखबारों का संपादन किया। 1957 में देश की संसद में जनसंघ के सिर्फ चार सदस्य थे, जिसमें एक अटल बिहारी वाजपेयी जी थे।  संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले अटलजी पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे। हिन्दी को सम्मानित करने का काम विदेश की धरती पर अटलजी ने किया।

3. देश सेवा के लियेआजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया

राजनीति में संख्या बल का आंकड़ा सर्वोपरि होने से 1996 में उनकी सरकार सिर्फ एक मत से गिर गई और उन्हें प्रधानमंत्री का पद त्यागना पड़ा। यह सरकार सिर्फ तेरह दिन तक रही. बाद में उन्होंने प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई। इसके बाद हुए चुनाव में वे दोबारा प्रधानमंत्री बने। राजनीतिक सेवा का व्रत लेने के कारण वे आजीवन कुंवारे रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था।




कविताओं को लेकर उन्होंने कहा था कि मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है।  उनकी कविताओं का संकलन ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ खूब चर्चित रहा जिसमें… हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा.. खास चर्चा में रही।

4. नाम के ही अनुरूप अटल जी ने भारत की अटल शक्ति का दुनिया को एहसास कराया 

हर परिस्थितियों और चुनौतियों को स्वीकार करते हुए भी उन्होंने अपने विचार और सिद्धांत से कभी समझौता नहीं किया. राजनीति में धुर विरोधी भी उनकी विचारधारा और कार्यशैली के कायल रहे। पोखरण जैसा आणविक परीक्षण कर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के साथ दूसरे मुल्कों को भारत की शक्ति का अहसास कराया। जनसंघ के संस्थापकों में से एक अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक मूल्यों की पहचान बाद में हुई और उन्हें भाजपा सरकार में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

5. जिसे कोई ना कर सका उसे अटल जी ने सभव कर दिखाया

वो अटल बिहारी वाजपेयी ही थे, जिन्होंने कहा था कि हम सरकार के लिए जोड़ तोड़ की राजनीति  नहीं करेंगे। उनकी 13 दिन की सरकार गिर गई थी।  इसके बाद वह 13 महीने के लिए पीएम बने। एक वोट से फिर से उनकी सरकार गिरी। इसके बाद फिर चुनाव हुए जिसमे वाजपेयी जी फिर से पीएम बने। इस बार उन्होंने करीब करीब 5 साल सरकार चला कर दिखा दी। एक दक्षिणपंथी पार्टी के मुखिया ने देश में सभी कोनों की पार्टियों को मिलाकर सरकार चलाने का फॉर्मूला देश को दिया।  इससे पहले देश में छह बार ऐसे प्रयास हो चुके थे, जब गठबंधन की सरकारें बनीं, लेकिन कोई भी उसे पूरा नहीं कर पाया। पहली बार देश में गठबंधन की गांठों से पार पाते हुए वाजपेयी ने पूरे पांच साल सरकार चलाई ये वह समय था, जब कहा जा रहा था कि देश में अब गठबंधन ही सत्य है। सरकारें अब गठबंधन की ही बनेंगी। लेकिन उन सरकारों को चला कोई नहीं पाया। ये काम अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने तीसरे कार्यकाल में पूरी की। उनके बाद मनमोहन सिंह ने दस साल गठबंधन की सरकार चलाई।



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