बेमेतरा की ओटेबंद गोशाला अौर कांजी हाउस में भूख-प्यास से 25 गायों की मौत

बेमेतरा (एजेंसी)| भूख और प्यास के कारण ओटेबंद गोशाला व रजकुड़ी कांजी हाउस में 25 से अधिक गायों की मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणो के मुताबिक यहां चारा-पानी आैर शेड की व्यवस्था नहीं होने से गायों की अकाल मौत हो रही है। गोशाला अवैध है। मंगलवार सुबह 7 गायों की मौत के बाद उनके शवों को गांव के अलग-अलग स्थानों में फेंका गया। गोशाला संचालक के इस कृत्य से ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। गोशाला की अध्यक्ष मैनादेवी मांडले व सचिव वर्षा कुर्रे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार मां प्रवीण करूणा समिति के नाम से भिनपुरी गांव के पास अवैध गोशाला संचालन हो रहा है। यहां व्यवस्था नहीं होने की वजह से गायों को रजकुड़ी पंचायत के कांजी हाउस लाया गया। लेकिन गोशाला संचालक यहां भी व्यवस्था बनाने में नाकाम रहा। नतीजतन गायों की मौत हो रही है।

कीचड़ से सराबोर कांजी हाउस का परिसर

रजकुड़ी में मवेशियों को खुले में रखा गया है। कांजी हाउस में शेड की व्यवस्था नहीं है। कांजी हाउस परिसर कीचड़ से सराबोर है। बीते 48 घंटे से हो रही बारिश में लगातार भीगने से मवेशियों की हालत खराब होने लगी। वहीं चारा नहीं होने से मवेशी कमजोर होने के साथ-साथ कीचड़ में फंसकर मर रहे हैं। भिनपुरी व रजकुड़ी में 25 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है। अभी रजकुड़ी कांजी हाउस में करीब 25 मवेशी हैं।




गोशाला खोलने 10 लाख व प्रत्येक मवेशी पर 25 रुपए अनुदान

गोशाला खोलने के लिए सरकार की ओर से 10 लाख रुपए अनुदान दिया जाता है। इसमें संबंधित व्यक्ति द्वारा गोशाला खोलने के लिए सारी व्यवस्था बनाकर पंजीयन व अनुदान के लिए गोसेवा आयोग ने आवेदन करता है। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट पर गोशाला के पंजीयन के साथ 10 लाख रुपए अनुदान जारी किया जाता है। वहीं प्रत्येक मवेशी की चारा-पानी व्यवस्था के लिए रोजाना 25 रुपए अनुदान मिलता है। जिसे बढ़ाकर 35 रुपए किए जाने का प्रस्ताव है। पशु चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस गोशाला का गोसेवा आयोग में पंजीयन नहीं हुआ है। ऐसे में बगैर पंजीयन इस गोशाला का संचालन जारी है। उल्लेखनीय है की गोसेवा आयोग में पंजीयन के बाद ही संबंधित गोशाला संचालक को सरकार से अनुदान मिलता है।

जानकारी के अनुसार गोशाला संचालक ने पंजीयन के लिए गोसेवा आयोग में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था। पंजीयन के पहले गोसेवा आयोग ने गोशाला के स्थल चयन, आवश्यक व्यवस्था को लेकर पशु चिकित्सा विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। जिसे तात्कालीन उप संचालक एनपी मिश्रा के निर्देश पर 6 महीने पहले गोसेवा आयोग को भेजी गई थी। जिसमें आवश्यक व्यवस्था होने के बाद ही पंजीयन की अनुशंसा की गई थी। इसलिए उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। जिला संयोजक गोवंश प्रकोष्ठ राजा पाण्डेय ने कहा की गोसेवा आयोग के अध्यक्ष से चर्चा कर बचे हुए 20-25 मवेशियों को जिले की गोशालाओं में शिफ्ट किया जाएगा। इसमें जांच कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

सरपंच को कई बार अवगत कराने बावजूद, गंभीर नहीं

ग्रामीण खेमराजपुरी गोस्वामी ने बताया की मवेशियों की मौत के बारे में सरपंच को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यहां मवेशियों के मृत शरीर को नोच-नोच कर खाने वाले कुत्ते हिंसक हो चुके हैं। ग्रामीणों द्वारा कुत्तों को भगाए जाने पर, वे काटने के लिए दौड़ाते हैं। ऐसे में ग्रामीण भयभीत है। ऐसे में मृत मवेशियों के कुत्ते के नोचने व सड़ने से गांव में बीमारी फैलने का भय बना हुआ है। ग्रामीणों ने कांजी हाउस से मवेशियों को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग की है।



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